तुलसी जयंती समारोह का हुआ शुभारम्भ
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चित्रकूट – मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की जनजातीय लोककला एवं बोली विकास अकादमी के अन्तर्गत संचालित तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट में दिनांक 18 अगस्त.2026 को गोस्वामी तुलसीदास ”तुलसी जयंती” समारोह अत्यंत भव्य, गरिमापूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। तुलसी शोध संस्थान की निदेशक डॉ. मंजूषा राजस जौहरी के निर्देशन में आयोजित इस समारोह में चित्रकूट की धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर विद्वत संवाद के साथ-साथ बघेली रामभक्ति गायन और नाट्य प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। “असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय” की मंगल भावना के साथ प्रारंभ हुए समारोह में तुलसी के साहित्य, रामकथा और चित्रकूट की सनातन सांस्कृतिक चेतना को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
चित्रकूट की सांस्कृतिक विरासत पर हुआ सार्थक संवाद
कार्यक्रम के प्रथम चरण में “चित्रकूट की धार्मिक पर विद्वत संवाद आयोजित किया गया। संवाद में चित्रकूट के संत-महंत, शिक्षाविद् एवं विद्वानों ने सहभागिता करते हुए चित्रकूट की गौरवशाली परंपरा और उसके समग्र विकास पर विचार रखे।
तुलसी शोध संस्थान की निदेशक डॉ. मंजूषा राजस जौहरी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि यह आयोजन मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी तथा संस्कृति परिषद की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से चित्रकूट की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने, गोस्वामी तुलसीदास के आदर्शों और रामकथा को जन-जन तक पहुंचाने तथा तुलसी साहित्य पर शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
संतोषी अखाड़ा के महंत रामजी दास महाराज ने चित्रकूट की महिमा और उसकी आध्यात्मिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन और रामभक्ति की जीवंत भूमि है। इसकी परंपराओं और संत-परंपरा को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भरत मंदिर के दिव्य जीवन दास जी ने चित्रकूट के महत्व को रेखांकित करते हुए यहां के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि चित्रकूट की पहचान उसकी आध्यात्मिकता, तप, त्याग और राममय जीवनशैली से है, इसलिए विकास के साथ उसकी मूल सांस्कृतिक आत्मा को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।
नयागांव के हेमराज चौबे ‘नन्हे राजा’ ने चित्रकूट को प्राचीन काल से ही शिक्षा और ज्ञान की भूमि बताते हुए कहा कि महर्षि अत्रि और दत्तात्रेय जैसे ऋषियों की परंपरा ने यहां ज्ञान-साधना की आधारभूमि तैयार की। आज भी चित्रकूट शिक्षा, संस्कार और दीक्षा की महत्वपूर्ण भूमि के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।

महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन से पधारे प्रोफेसर तुलसीदास जी ने गोस्वामी तुलसीदास के जीवन, उनके साहित्य और रामचरितमानस से जुड़े शोधपरक तथ्यों को सामने रखा। उन्होंने तुलसी साहित्य की लोकमंगलकारी दृष्टि और भारतीय समाज के नैतिक-सांस्कृतिक जीवन में उसके महत्व को रेखांकित किया।
इससे पूर्व सद् सेवा संघ ट्रस्ट की निदेशिका डॉ. उषा भाभी जी ने चित्रकूट में उनके संस्थान द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने चित्रकूट के समग्र विकास के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए तुलसी शोध संस्थान की गतिविधियों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
विद्वानों और गणमान्य नागरिकों की रही सहभागिता
संवाद सत्र में महंत राघव दास जी महाराज जानकी महल, महंत भैरो दास जी महाराज राष्ट्रीय कुतवाल संत समाज, श्री नारायण उपाध्याय, प्रो. डॉ. घनश्याम गुप्ता, डॉ. कमलेश थापक, प्राचार्य शंकर दयाल पांडे, श्री सुरेंद्र द्विवेदी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा, इंजीनियर कार्तिकेय द्विवेदी, नगर पंचायत पार्षद रविमाला सिंह, श्री देवदत्त तिवारी, शिक्षाविद् श्री श्रीधर त्रिपाठी, श्री के.के. बाजपाई, श्री संतोष मिश्रा, डॉ. प्रमिला मिश्रा, श्री मदन तिवारी सहित अनेक संत, विद्वान, शिक्षाविद् एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन श्री अशोक कुमार दीक्षित ने किया। उनका संचालन बौद्धिक, प्रभावशाली और विषयानुकूल रहा। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न प्रस्तुतियों को केवल क्रमबद्ध ही नहीं किया, बल्कि संवाद सत्र के दौरान चित्रकूट के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और रामकथा की लोकमंगलकारी परंपरा को भी सार्थक रूप से जोड़ा। अतिथियों के विचारों को उचित संदर्भ देते हुए उन्होंने कार्यक्रम को एक जीवंत वैचारिक मंच का स्वरूप प्रदान किया।
बघेली रामभक्ति गायन ने बांधा समां
संवाद सत्र के पश्चात रीवा से पधारीं श्रीमती विभा सिंह एवं उनके साथी कलाकारों ने बघेली रामभक्ति गायन की मनोहारी प्रस्तुति दी। बघेली लोकभाषा में प्रस्तुत रामभक्ति के गीतों ने चित्रकूट की धरती की लोक-संस्कृति और रामभक्ति को एकाकार कर दिया। श्रोतागण भक्ति और ज्ञान के रस में सराबोर हो उठे।
‘सबके राम’ ने दिया रामचरित्र का संदेश
समारोह की अंतिम प्रस्तुति संस्कार कला संघ जबलपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नाट्यकृति ‘सबके राम’ रही। श्री कमलेश यादव एवं उनके सहयोगी कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवनचरित्र को अत्यंत सहज, प्रभावी और मनोरम नाट्य रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्तुति ने राम के आदर्श, मर्यादा, सत्य और लोकमंगल की भावना को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों तक पहुंचायाl
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. मंजूषा राजस जौहरी ने मध्यप्रदेश शासन, जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी तथा संस्कृति परिषद, भोपाल की ओर से सभी संतों, विद्वानों, कलाकारों, अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
तुलसी जयंती का यह समारोह न केवल गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति और उनके साहित्य को नमन करने का अवसर बना, बल्कि चित्रकूट की सनातन बु सांस्कृतिक चेतना, लोकभाषा, रामभक्ति, ज्ञान-परंपरा और समग्र विकास की संभावनाओं पर सार्थक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच भी सिद्ध हुआ।
जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश।
