स्वास्थ्य के सूचकांकों में सुधार लाने के प्रयास करें
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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक सम्पन्न
सतना – कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों का जिले में गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन करते हुए स्वास्थ्य के सूचकांकों में सुधार लाने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और महिला बाल विकास के विकासखण्ड स्तर के अधिकारी समन्वय के साथ मैदानी कार्यकर्ताओं के सेक्टर और विकासखण्ड स्तरीय संयुक्त बैठक में समीक्षा करे। गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर ने ये निर्देश दिये। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला, सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह सहित सभी सीडीपीओ, बीएमओ, बीसीएम, बीपीएम उपस्थित थे।
अनमोल पोर्टल पर ए.एन.सी. रजिस्ट्रेशन की समीक्षा में बताया गया कि 1 अप्रैल से एक जुलाई 26 तक 6539 रजिस्ट्रेशन लक्ष्य के विरूद्ध 5787 रजिस्ट्रेशन किये गये है, जो 88 फीसदी है। उचेहरा विकासखण्ड में सबसे न्यून प्रगति 85 फीसदी होने पर बीईई क्रांति सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने कहा कि ब्लाक स्तर पर सीईओ जनपद के समन्वय से बीएमओ और सीडीपीओ मैदानी कर्मचारियों की सेक्टर वाइज बैठकें लेकर स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों की समीक्षा करें।
सीवियर एनीमिया मैनेजमेंट में बताया गया कि 5805 गर्भवती माताओं की एनीमिया जांच में 30 केस चिन्हित किये गये। इनमें 19 प्रकरणों में मैनेजमेंट किया गया। कलेक्टर ने कहा कि इतनी बडी संख्या में न्यून संख्या में सीवियर एनीमिक मिलना और मात्र 19 प्रकरणों में ही एनीमिया मैनेजमेंट करना कार्यक्रम की क्रियान्वयन की कमजोरी दर्शाता है। कलेक्टर ने कहा कि एनीमिया के प्रकरणों में स्वास्थ्य और महिला बाल विकास की संयुक्त समीक्षा और एक्शन होना चाहिए ताकि मातृ-मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। कलेक्टर ने अर्बन एपीएम सुधेश शुक्ला का कार्य में लापरवाही पर एक सप्ताह का वेतन काटने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने इस अवधि में हुई तीन मातृ-मृत्युओं की डैथ आडिट की। उन्होंने मृत्यु के संभावित कारण और परिस्थितियों की जानकारी लेते हुए किये जा रहे सुधारात्मक उपाय की जानकारी ली। उन्होंने आयुष्मान, निक्षय शिविर, दस्तक अभियान की भी समीक्षा की।
पोषण कार्यक्रमों की समीक्षा में बताया गया कि जिले की 2054 आंगनवाडी केन्द्रों में से 6 आंगनवाडी 11 से 20 दिनों के बीच खुलने वाली पाई गई है। शेष 2048 माह में 24 दिन खुल रही है। आंगनवाडी के 61242 बच्चों में से 40109 के स्वयं के आधार और 37946 बच्चों की अपार आईडी बनाई गई है। कलेक्टर ने कहा कि आंगनवाडी केन्द्रों में टीएचआर और मल्टी विटामिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराये। आरबीएसके की टीम समय-समय पर नियमित रूप से बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करे।
भारत विमर्श सतना मध्य प्रदेश।
