July 26, 2026

विवेक चतुर्वेदी

1 min read
Spread the love

झुक गया है गुलमोहर बाम तक
खबर आएगी देखना शाम तक।

खास – खास में ही ‘खास’ बॅंट गया
आम आया ही कहाॅं है ‘आम’ तक ।

साॅंस में जिनकी खुशबू से हम होते थे
जबॉं पे आता भी नहीं अब नाम तक ।

बैठ दिल्ली में दस बीस मुॅंह चलाते हैं
मरने जाता है एक फौजी लाम तक।

शेख साहब जरा उड़ेल दो तो मीना
तौबा हो जाए न अगले जाम तक।

हम काकरोच हैं बहुत पुराने हैं
रहेंगे क़ायम और इख्ति़माम तक।।

इख्ति़माम – समापन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *