February 13, 2026

ईवीएम में गलती या गलती में ईवीएम !

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– सबलोक कुमार सिंह

हाल के जेएनयू चुनाव के बाद जिस प्रकार से ईवीएम पर बहस हो रही है, एक बार फिर ईवीएम संदेह के घेरे में है . उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद मायावती के ईवीएम पर आक्रामक रुख और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी द्वारा ईवीएम पर डेमो ने ईवीएम पर शक को बल दिया था. अगर पिछले कुछ सालों की बात करें तो 2009 में भाजपा गठबंधन के पीएम उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी ,एस. स्वामी ,और तत्कालीन सूचना और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और पूरे एनडीए ने ईवीएम पर सवाल उठाये थे. भाजपा नेता और सैफोलोजिस्ट जीवीअल नरसिम्हा ने तो ईवीएम पर एक पूरी किताब लिख डाली थी. जिसकी भूमिका खुद लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी .

आइये आपको बताये ईवीएम कैसे काम करती है

मतदान में प्रयोग होने वाली ईवीएम मशीन दो इकाइयों में होती है -पहला कण्ट्रोल यूनिट दूसरा बैलेटिंग यूनिट. दोनों इकाइयां आपस में पाँच मीटर के तार से जुड़ी होती है. कण्ट्रोल यूनिट चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पोलिंग अफसर के पास होता है और बैलेटिंग यूनिट मतदान कक्ष में जहाँ मतदाता अपना मत डालते हैं. कण्ट्रोल यूनिट ईवीएम का दिमाग होता है. बैलेटिंग यूनिट तभी चालू होती है जब पोलिंग अफसर उसमे लगा बैलट बटन दबाता है. ईवीएम छह वोल्ट की सिंगल आइकॉन बैटरी से चलती है जो कण्ट्रोल यूनिट में लगी होती है. जिन इलाको में बिजली नहीं हो वहाँ भी इसका सुविधापूर्वक इस्तेमाल हो सकता है.

चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम की पहली पहल

सन 1977 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन ऑफ इंडिया से ईवीएम को प्रोटोटाइप (नमूना) बनाने के लिए संपर्क किया गया. 6 अगस्त 1980 को चुनाव आयोग ने प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ईवीएम का प्रोटोटाइप दिखाया. उस समय ज्यादा राजनीतिक दलों का रुख सकारात्मक था. उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया को ईवीएम बनाने का आर्डर दिया गया.

भारत में ईवीएम की शुरुआत

1982 में केरल विधानसभा चुनाव के दौरान पहली बार ईवीएम का व्यावहारिक परीक्षण किया गया. जनप्रतिनिधित्व कानून (आरपी एक्ट) 1951 के तहत चुनाव में केवल बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल हो सकता था इसलिए आयोग ने सरकार से इस कानून में संशोधन करने की मांग की. हालांकि आयोग ने संविधान संशोधन का इंतजार किये बगैर आर्टिकल 324 के तहत मिली आपातकालीन अधिकार का इस्तेमाल करके केरल की पारावुर विधानसभा के कुल 84 पोलिंग स्टेशन में 50 पर ईवीएम मशीन का इस्तेमाल किया.

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