August 8, 2026

डिजिटल इंडिया में शर्मनाक तस्वीर: सतना में 1997 से ‘सड़क’पर चल रहा सरकारी स्कूल,मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर

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डिजिटल इंडिया में शर्मनाक तस्वीर: सतना में 1997 से 'सड़क'पर चल रहा सरकारी स्कूल,मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर
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सतना- (कोठी) – देश में ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘बढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ जैसे बड़े-बड़े दावों के बीच मध्य प्रदेश के सतना जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक जमीनी हकीकत सामने आई है। कोठी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम दिदौध का शासकीय प्राथमिक शाला भवन के अभाव में पिछले 29 वर्षों (साल 1997) से खुले आसमान के नीचे सड़क पर संचालित हो रहा है।यहाँ के मासूम छात्र-छात्राएं कड़ाके की धूप, कड़कती ठंड और रिमझिम बारिश के बीच धूल और गाड़ियों के शोर के बीच सड़क किनारे बैठकर ककहरा सीखने को मजबूर हैं।29 साल बीते, नहीं नसीब हुई स्कूल की छतस्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि वर्ष 1997 में इस प्राथमिक शाला की शुरुआत हुई थी।

तब से लेकर आज तक, लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग इस स्कूल को एक अदद पक्का भवन मुहैया नहीं करा सका है। कई सरकारें आईं और गईं, कई कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी बदले, लेकिन दिदौध के बच्चों की तकदीर नहीं बदली। स्कूल के पास अपनी जमीन और भवन न होने के कारण शिक्षकों के पास भी बच्चों को सड़क पर बैठाकर पढ़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता।हादसों का साया और पढ़ाई का नुकसानसड़क किनारे स्कूल लगने के कारण यहाँ हर वक्त किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले डंपर, ट्रैक्टर और दुपहिया वाहनों के बीच बच्चों को बैठना पड़ता है। जरा सी भी लापरवाही किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है। इसके अलावा, सड़क पर लगातार होने वाली आवाजाही और गाड़ियों के हॉर्न के कारण बच्चे पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। बारिश के दिनों में तो स्थिति और बदतर हो जाती है; स्कूल में छुट्टी करनी पड़ती है या बच्चों को किसी के घर के छज्जे के नीचे शरण लेनी पड़ती है।प्रशासनिक मौन पर उठ रहे सवाल’शिक्षा का अधिकार कानून’ (RTE) के तहत हर बच्चे को सुरक्षित स्कूल भवन, साफ पानी और शौचालय की सुविधा मिलना उसका कानूनी अधिकार है। लेकिन दिदौध प्राथमिक शाला में इन बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने जनपद पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय और जनप्रतिनिधियों तक कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन हर बार सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला।ग्रामीणों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन के निर्माण के लिए ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए, तो वे बच्चों के साथ जिला कलेक्टरेट के सामने उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

अहेश लारिया ब्यूरोचीफ भारत विमर्श सतना मध्य प्रदेश।

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