बुढ़वा मंगल पर बूढ़े हनुमान मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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मान्यता है कि 5 सौ वर्ष पहले मंदाकिनी से मिले बूढ़े हनुमान
चित्रकूट उप्र – सीतापुर स्थित करीब 500 वर्ष पहले बूढ़े हनुमान मंदिर में मंगलवार को बुढ़वा मंगल के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दिनभर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आरती में शामिल हुए। मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों को प्रसाद भी वितरित किया गया।
बुढ़वा मंगल को देखते हुए मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया , फूलों से रंगोली और दीप जलाए गए जिससे मंदिर लाइटों से जगमगा उठा एवं जमकर आतिशबाजी की गई साथ ही विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आए भक्त भी शामिल हुए। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर के पुजारी रामजी मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालु इस मंदिर को सामान्य तौर पर बूढ़े हनुमान के नाम से जानते हैं। यहां विराजमान प्रतिमा को डूबे हनुमान के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार करीब 500 वर्ष पहले यहां रहने वाले एक बाबा को मंदाकिनी नदी से हनुमान जी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। इसके बाद से प्रतिमा को डूबे हनुमान के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है। बुढ़वा मंगल के अवसर पर प्रतिवर्ष विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं।
दिनभर मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
भारत विमर्श चित्रकूट उत्तर प्रदेश।
