October 27, 2026

पद्मश्री डॉ. बी. के. जैन के प्रसाद में हजारों की संख्या में पहुंचे उनके चाहने वाले

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पद्मश्री डॉ. बी. के. जैन के महाप्रसाद में हजारों की संख्या में पहुंचे उनके चाहने वाले
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चित्रकूट – परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी द्वारा स्थापित श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी  एवं विश्व ख्याति प्राप्त श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक पद्मश्री डॉ बुधेन कुमार जैन(बी के जैन ) ने 27 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को लगभग शाम 4 बजे चित्रकूट की पावन धरती पर अंतिम सांस लेते हुए सबको अलविदा कहकर अपने आपको प्रभु चरणों में समाहित कर लिया उनके इस अन्नत यात्र से समूचे विंध्य सहित  देश में शोक की लहर दौड़ गई। जिस पवन भूमि पर उन्होंने अपना जीवन सेवा और समर्पण पर लगाया उसी भूमि पर उन्होंने अपने को समाहित भी कर लिया।
डॉ  जैन ने अपने जीवन में आत्म अनुशासन, आत्म समर्पण और आत्म विश्वास को उतारा और उनकी यही सोच ने श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट को जीरो से हीरो तक पहुंचाने का काम किया और उनके आत्म त्याग और समर्पण ने महानायक बना दिया।  और उन्हीं की स्मृति में 13 मार्च को रघुवीर मन्दिर जानकी कुंड में महाप्रसाद (भंडारे) का आयोजन किया गया जिसमें चित्रकूट के सभी संत महंत, जनप्रतिनिधि,प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारीगण, समस्त ट्रस्टीगण, समस्त गुरु भाई बहन,समस्त सदगुरु परिवार के सदस्यगण अन्य गणमान्य नागरिक एवं चित्रकूट क्षेत्र सहित देश के कोने कोने से हजारों की संख्या में उनके चाहने वाले पहुंचे और उस महानायक के  महाप्रसाद कार्यक्रम में सम्मिलित होकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर महाप्रसाद ग्रहण किया।
डॉ जैन किसी के परिचय के मोहताज नहीं थे,बल्कि अपने आप में ओ खुद एक पहचान थे
डॉ जैन एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने नेत्र चिकित्सक के रूप अपनी सेवा और समर्पण के जरिए देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी अपनी और सदगुरु  नेत्र चिकित्सालय के नाम की एक अलग ही पहचान बनाई है।  डॉ जैन 1974 से सदगुरु  नेत्र चिकित्सालय से जुड़े और पांच दशकों से ऊपर तक गरीब और जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने का काम किया । 1948 में जन्मे डॉ जैन की प्रारंभिक शिक्षा शासकीय विद्यालय व्यंकट क्रमांक सतना में हुई,इसके बाद 1968 से 1973 तक एस एस मेडिकल कॉलेज रीवा से हुई इसके बाद 1977 से 1979 तक पी जी की शिक्षा उन्होंने मुंबई से प्राप्त की थी डॉ जैन वर्तमान AIIms रायपुर के अध्यक्ष थे ।आपको बता दें कि अंधत्व निवारण एवं नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा कार्य के लिए विगत पांच दशकों में वह पद्मश्री से लेकर कई राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय एवं राजकीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।
*देश विदेश में सैकड़ों अवॉर्ड किया अपने नाम*
वर्ष 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक नेत्र चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए ‘ढान्ढा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
इसके बाद वर्ष 2003 में उन्हें ‘फिरदौसी अवार्ड’ मिला।
2004 में मुंबई में आयोजित आई एडवांस सम्मेलन में उन्हें सामुदायिक नेत्र चिकित्सा में उत्कृष्ट कार्य हेतु ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ प्रदान किया गया।
वर्ष 2005 में लंदन स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर आई हेल्थ के भारतीय पूर्व छात्रों द्वारा उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक नेत्र चिकित्सा कार्य’ के लिए सम्मानित किया गया।
वर्ष 2007 में उन्हें ‘आर. के. सेठ मेमोरियल अवार्ड’ 
2008 में ‘ग्लोरी ऑफ इंडिया अवार्ड’ प्राप्त हुआ।
2010 में अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सम्मेलन (AIOS) में उन्हें ‘सामुदायिक सामाजिक पुरस्कार’ और ग्रामीण समुदाय में उत्कृष्ट नेत्र सेवा के लिए ‘के. आर. दत्ता पुरस्कार’ से नवाजा गया।
2013 उनके लिए सम्मान से भरा वर्ष रहा, जब उन्हें ‘समाज रत्न अवार्ड’, विजन 2020 द्वारा ‘श्री धर्मसी नेनसी ओमान अवार्ड’, ‘
डॉ. एम.सी. नाहटा – राष्ट्रीय नेत्र सुरक्षा पुरस्कार’
एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी (APAO) द्वारा ‘अंधत्व निवारण में उत्कृष्ट कार्य हेतु पुरस्कार’ प्रदान किए गए।
2014 में उन्हें ‘5वां वार्षिक स्पिरिट ऑफ ह्यूमैनिटी अवार्ड’
तमिलनाडु नेत्र चिकित्सक संघ द्वारा ‘सामुदायिक नेत्र चिकित्सा व्याख्यान सम्मान’ प्राप्त हुआ।
वर्ष 2016 में उन्हें ‘डॉ. जे. एल. शर्मा अवार्ड’, इंडियन सोसाइटी ऑफ कॉर्निया एंड केराटो-रिफ्रैक्टिव सर्जन्स द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’,
‘पद्मश्री प्रोफेसर. टी. पी. लहाने ओरिएंटेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
2017 में उन्हें विजन 2020 का ‘श्री एस. एन. शाह पुरस्कार’,
IIRIS वार्षिक सम्मेलन में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’,
MSICS को बढ़ावा देने के लिए ‘एक्सीलेंस इन ऑप्थाल्मोलॉजी अवार्ड’ प्राप्त हुआ।
2018 में उन्हें AIOS द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’
2019 में ‘भारत भूषण सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
भगवान महावीर फाउंडेशन, चेन्नई द्वारा 24वां ‘महावीर पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
डॉ. गुल्लापल्ली राव एंडोवमेंट अवार्ड’ भी प्राप्त हुआ।
2023 में इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी (IJO) द्वारा उन्हें “भारतीय नेत्र चिकित्सा के जीवित किंवदंती (Living Legend in Indian Ophthalmology)” के रूप में मान्यता दी गई, और उनके सम्मान में पत्रिका ने अपना मुखपृष्ठ और एक विशेष संपादकीय उन्हें समर्पित किया।
2025 अप्रैल में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर द्वारा डी.लिट् की मानद उपाधि दी गयी
2025 मई में इंडियन विजनरी अवार्ड से गोल्डन स्पैरो संसथान ने पुरुस्कृत किया गया
चिकित्सा के क्षेत्र में पद्मश्री 27 मई 2025 महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा सम्मानित किया गया और जून 2025 में हिपोक्रेट्स लगेसी अवार्ड से दिल्ली में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा नवाजा गया।
अपने पीछे छोड़ गए भरा भदूला परिवार
वहीं डॉ जैन की धर्म पत्नी ऊषा जैन भी मानव सेवा,गौ सेवा और महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के काम अपनी सेवा संस्थान में महिला, शिक्षा समिति की अध्यक्षा के रूप में देती है, डॉ जैन दो पुत्रों के पिता थे बड़े पुत्र जिनेश जैन है और छोटे डॉ इलेश जैन है, डॉ इलेश जैन श्री सदगुरु सेवा संघ के ट्रस्टी एवं वर्तमान में सदगुरु नेत्र चिकित्सालय जानकीकुंड चित्रकूट के सी ई ओ के पद पर तैनात है और बखूबी अपने पिता डॉ जैन के पद चिन्हों पर चलकर अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वाहन करते हुए श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट को नया आयाम देने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहते है,  डॉ जैन की दो बहुएं बड़ी श्रुति जैन छोटी मौसम जैन है, डॉ जैन के तीन पौत्र और एक पौत्री है प्रियांश जैन, निर्वाण जैन,अर्णव जैन और अरिहा जैन। वहीं इस महाप्रसाद आयोजन में आए सभी सम्मानित अतिथियों का डॉ जैन के परिवार ने एवं समस्त सदगुरु परिवार ने आभार व्यक्त किया।

जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश

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