गजब का हाल! शोरूम से निकलने के पांच साल पहले ही कट गया चालान
1 min read
जौनपुर – परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालनवंबर 2025 में जारी हुआ नंबर, जबकि जुलाई 2020 में ही कट गया था 800 रुपये का चालान जिस मॉडल की गाड़ी बाजार में आई भी नहीं थी, उस पर तीन सवारी का उल्लंघन दर्ज मामला उजागर होने पर अधिकारियों ने खुद जमा की जुर्माना राशि, एक-दूसरे पर मढ़ रहे लापरवाही का आरोप
अगर आप नई बाइक या कार खरीदें और कुछ दिन बाद पता चले कि जिस नंबर की गाड़ी आपने अभी-अभी ली है, उस पर पांच साल पहले ही चालान कट चुका है, तो स्वाभाविक है कि आप हैरान रह जाएंगे। सवाल यह उठता है कि जब उस समय न गाड़ी आपके पास थी और न ही वह नंबर सीरीज अस्तित्व में थी, तो चालान आखिर किस आधार पर काटा गया?
ऐसा ही चौंकाने वाला मामला जौनपुर में सामने आया है। यहां एक वाहन के शोरूम से बाहर निकलने से पांच वर्ष पहले ही उस पर 800 रुपये का चालान दर्ज दिख रहा है।
मड़ियाहूं निवासी राजेंद्र प्रसाद की पुत्री अंजू, जो सिकरारा क्षेत्र में शिक्षिका हैं, ने नवंबर 2025 में अपने नाम से बुलेट का नवीनतम वैरिएंट खरीदा। उनके अनुसार, उसी माह उन्हें वाहन संख्या UP 62 DJ 0401 आवंटित हुई। कुछ दिनों बाद जब उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल पर विवरण जांचा, तो उनके वाहन पर 800 रुपए का लंबित चालान प्रदर्शित हुआ। गहन जांच करने पर पता चला कि जुलाई 2020 में इसी नंबर की बुलेट पर तीन सवारी बैठाने के आरोप में चालान काटा गया था। अभिलेखों में चालान का स्थान सिकरारा, मड़ियाहूं तथा तेजी बाजार क्षेत्र दर्शाया गया है। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद आनन-फानन में चालान की धनराशि जमा करा दी गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कैसे तय हो गया कि यही नंबर बुलेट को मिलेगा? सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2020 में चालान काटने वाले उपनिरीक्षक को यह कैसे ज्ञात हुआ कि भविष्य में यही नंबर एक मोटरसाइकिल को आवंटित होगा? जिस समय चालान दर्शाया जा रहा है, उस अवधि में न तो यह वाहन पंजीकृत था और न ही संबंधित मॉडल बाजार में उपलब्ध था।
परिवहन विभाग के अधिकारी भी इस विसंगति पर आश्चर्य जता रहे हैं। अभिलेखों में उस समय के तत्कालीन दरोगा का नाम दर्ज है, जिससे मामला और भी जटिल हो गया है।
पीड़िता ने उठाए सवाल
अंजू का कहना है कि जिस तारीख का कथित चालान दर्ज है, उस समय यह वाहन अस्तित्व में ही नहीं था। वाहन का निर्माण और पंजीकरण वर्ष 2024-25 में हुआ है। ऐसे में पांच वर्ष पूर्व का चालान किस आधार पर जोड़ा गया, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि डीलरशिप से वाहन खरीदते समय किसी भी प्रकार के लंबित चालान या पूर्व रिकॉर्ड की जानकारी नहीं दी गई थी। पंजीकरण भी विधिवत नए सिरे से हुआ। इसके बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर पुराने वर्ष का चालान प्रदर्शित होना समझ से परे है।
इस संबंध में एआरटीओ जौनपुर सत्येंद्र कुमार ने कहा,
“ऑनलाइन चालान यातायात पुलिस द्वारा काटा जाता है। यह मामला उनके स्तर का है।”
फिलहाल, दोनों विभाग एक-दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आम नागरिकों के मन में यह सवाल कायम है कि यदि नई गाड़ी पर पुराने चालान दर्ज हो सकते हैं, तो ऑनलाइन प्रणाली की विश्वसनीयता कितनी सुरक्षित है?
अमरजीत सिटी रिपोर्टर भारत विमर्श जौनपुर उत्तर प्रदेश
