January 25, 2026

बलात्कारी बाबाओं पर सरकार की रहनुमाई कितनी सही?

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अनुज अवस्थी, नई दिल्ली: नाबालिग लड़की केसाथ रेप और योनशोषण को लेकर जोधपुर की स्पेशल कोर्ट ने आसाराम को उम्र कैद की सजा का ऐलान कर दिया। जिसके बाद आसाराम काफी निराश और हतास हो गया। कोर्ट के आदेश के बाद आसाराम को आजावीन कारावास के तहत जेल भेज दिया। यहां पर हमें समझना होगा कि कुछ ढोंगी बाबाओं के चलते लगातार हिंदु धर्म और पूरे संत समाज पर लांछन लग रहा है। संत और बाबाओं के नाम पर राम रहीम और आसाराम जैसे बाबा लोगों के साथ छल-कपट और रेप जैसी जघन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जो कि इस देश के संत समाज और हिंदू धर्म के लिए बुल्कुल भी सही नहीं है।

इस देश में एक के बाद एक नए ढोंगी बाबा का असली चेहरा लोगों के सामने उजागर हो रहा है। इतना ही नहीं हर बाबा के पास करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति होने की भी बात सामने आती है। दरअसल ये कहने को बाबा हैं असल में इनके ठाट किसी राजा महाराजाओं से कम नहीं होते। अब ऐसे में सवाल उठता है, कि बाबाओं के पास इतना धन और सोहरत कहां से आ जाती है। क्योंकि बाबाओं का मतलब होता है बैरागी, धन, संपत्ति से मोह न रखने वाला। इसके बाबजूद इन ढोंगी बाबओं के पास अरबों की संपत्ति है।

देश के सभी राजनैतिक दल के राजनैता इन ढोंगी और बलात्कारी बाबाओं की शरण में बने रहते हैं इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता। अगर हम बलात्कारी आसाराम के पुराने रिकाॅर्ड को खंगाले तो पता चलता है कि देश का ऐसा कोई भी राजनैतिक दल नहीं होगा जिसके नेता इन बाबाओं की शरण न लेते हों। और इसकी वजह है वोट बैंक। बदले में ये राजनैतिक दल बाबाओं को मूंह मागी रकम मुहैया कराती हैं। शायद बाबाओं के अमीर होने की यही वजह है। मसलन, मौजूदा वक्त में बाबाओं का मतलब वोट बैंक हो चला है।

अभी हाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लगा कि कुछ बाबा भाजपा सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर रेली करने वाले हैं तो सूबे के मुख्यमंत्री ने राज्य में पांच बाबाओं को राज्यमंत्री पद का दर्जा दे दिया। हमें समझना होगा कि ये राजनेता 21वी सदी के भारत को आखिर किस दिशा की ओर लेकर जा रहे हैं।

 

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