ग्राउंड जीरो से किसानों की आवाज
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जौनपुर उप्र – सिकरारा ब्लॉक के सिकंदरा गांव निवासी कम्युनिस्ट नेता विजय यादव उर्फ ऊदल ने ग्राउंड जीरो से किसानों की समस्याओं और उनसे जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि किसानों की चुनौतियां केवल खेत और फसल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा संबंध बाजार व्यवस्था, सरकारी नीतियों, लागत, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज और फसल के उचित मूल्य से है।
भारत विमर्श न्यूज के साथ बातचीत में विजय यादव ने कहा कि खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों की सबसे बड़ी मांग उनकी फसलों के लिए लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें बाजार मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने मंडी व्यवस्था को मजबूत करने, पारदर्शी खरीद सुनिश्चित करने और भुगतान में देरी खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विजय यादव ने सिंचाई व्यवस्था की बदहाली, बिजली की अनियमित आपूर्ति और नहरों की सफाई न होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि समय पर पानी और बिजली न मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित होता है। कई गांवों में किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे उनकी लागत और बढ़ जाती है।
उन्होंने फसल बीमा योजना और सरकारी मुआवजे की प्रक्रिया को भी किसानों के लिए अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की। प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि, सूखा या अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों को समय पर राहत नहीं मिलती। कागजी कार्रवाई और सर्वे की जटिल प्रक्रिया के कारण कई पात्र किसान सहायता से वंचित रह जाते हैं।
कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई से होगा। उन्होंने किसान संगठनों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने की अपील की। उनका कहना है कि जब तक किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य, सस्ती कृषि सामग्री और मजबूत सरकारी सहायता नहीं मिलेगी, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।
उन्होंने सरकार से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने, स्थानीय स्तर पर समस्याओं की नियमित समीक्षा करने और कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने की मांग की। विजय यादव ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी उपेक्षा का असर पूरे समाज पर पड़ता है।
ग्राउंड जीरो से सामने आई किसानों की यह आवाज बताती है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी किसान लागत, बाजार, सिंचाई और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब जरूरत है कि इन मुद्दों पर ठोस पहल हो और किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध समाधान मिले।
अमरजीत सिटी रिपोर्टर भारत विमर्श जौनपुर उत्तर प्रदेश।
