अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भजन गायक डॉ. सुधीर व्यास ने सुमधुर भावपूर्ण प्रस्तुतियों से भजन संध्या को बनाया यादगार
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संत-वाणी, तुलसी भक्ति और भजन संध्या से भावविभोर हुआ श्रोता
चित्रकूट – मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग की जनजातीय लोककला एवं बोली विकास अकादमी के अन्तर्गत संचालित तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट के द्वारा ’’तुलसी जयन्ती’’ समारोह दिनांक 18 एवं 19 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस 19 अगस्त 2026 को उद्घाटन सत्र का शुभारंभ चित्रकूट कामदगिरि प्रमुख द्वार के महंत परमपूज्य श्री मदन गोपाल दास जी महाराज, आचार्य मंदिर के पुजारी श्री भोले जी महाराज, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, चित्रकूट की प्रभारी नंदिनी बहन तथा तुलसी शोध संस्थान की निदेशिका डॉ. मंजूसा राजस जौहरी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर परमपूज्य मदन गोपाल दास जी महाराज का चित्रकूट और श्रीराम के संबंध पर सारगर्भित एवं भावपूर्ण सत्संग हुआ। उन्होंने चित्रकूट की आध्यात्मिक महत्ता, भगवान श्रीराम के वनवास-काल से जुड़े प्रसंगों तथा गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति-भावना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चित्रकूट केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना और श्रीराम की भक्ति का ऐसा पावन केंद्र है, जिसकी अनुभूति संत परंपरा और तुलसी साहित्य में निरंतर दिखाई देती है। उनकी संतवाणी ने उपस्थित श्रोताओं को आध्यात्मिक भावभूमि से जोड़ दिया।
इसके पश्चात इंदौर से पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भजन गायक डॉ. सुधीर व्यास ने अपनी सुमधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों से भजन संध्या को यादगार बना दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय भजन “ये चमक, ये दमक, सब कुछ सरकार तुम्हीं से है” सहित अनेक भजनों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी में भक्ति, संगीत और भाव की ऐसी त्रिवेणी प्रवाहित हुई कि पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा। चित्रकूट की पावन धरा पर तुलसी जयंती के इस आयोजन को उनकी भजन प्रस्तुतियों ने और अधिक भव्य एवं दिव्य बना दिया।
कार्यक्रम के संपूर्ण संयोजन एवं संचालन का दायित्व विद्वान वक्ता श्री अशोक कुमार दीक्षित ने प्रभावशाली ढंग से निभाया। अपने सधे हुए वक्तृत्व, साहित्यिक अभिव्यक्ति और मंच संचालन की विशिष्ट शैली से उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्येक प्रसंग को एक-दूसरे से इस प्रकार जोड़े रखा, मानो विविध पुष्पों को एक सुंदर माला में पिरो दिया गया हो। उनकी प्रभावपूर्ण वाणी ने पूरे कार्यक्रम को गरिमा, प्रवाह और जीवंतता प्रदान की।
समारोह के समापन अवसर पर तुलसी शोध संस्थान की निदेशिका डॉ. मंजूसा राजस जौहरी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, सम्मानित अतिथियों, आगंतुकों तथा चित्रकूट के वरिष्ठ नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों की सफलता सामूहिक सहभागिता से ही संभव होती है तथा भविष्य में भी सभी के सहयोग और मार्गदर्शन की अपेक्षा रहेगी।


तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजित यह द्विदिवसीय समारोह साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और लोकमंगल की भावना का सुंदर संगम बनकर सामने आया। संतों की वाणी, तुलसी की भक्ति और भजन संगीत की मधुर त्रिवेणी ने चित्रकूट की पावन धरती पर उपस्थित जनसमुदाय को गहरे आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर दिया। समारोह अत्यंत गरिमामय, भावपूर्ण एवं उत्साहजनक वातावरण में संपन्न हुआ।
जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश।
