‘सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तां हमारा…’ गुनगुनाते साइकिल से निकले समाजवादी सिपाही:तपस्वी
1 min read
जौनपुर – सिकरारा जौनपुर क्षेत्र के पोखरियापुर गांव निवासी समाजवादी सिपाही श्यामबहादुर यादव उर्फ तपस्वी की साइकिल यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि संघर्ष, विचारधारा और नेताजी से जुड़ी यादों की कहानी है। साइकिल के पहियों के साथ आगे बढ़ते तपस्वी जब ‘सारे जहां से अच्छा, हिंदुस्तां हमारा…’ की पंक्तियां गुनगुनाते हैं तो उनकी आवाज में जोश के साथ बीते संघर्षों की टीस भी महसूस होती है। अपनी यात्रा के दौरान वह लोगों को नेताजी के जीवन और संघर्षों की कहानी सुनाते हुए अपने राजनीतिक सफर के अनुभव भी साझा करते हैं। बातचीत में कभी नेताजी के संघर्षों का जिक्र आता है तो कभी समाजवादी विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की बात करते हुए वह भावुक हो उठते हैं।
श्यामबहादुर यादव बताते हैं कि साइकिल उनके लिए महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि समाजवादी विचारधारा की पहचान है। इसी साइकिल के सहारे उन्होंने गांव-गांव और कस्बे-कस्बे लोगों के बीच पहुंचकर अपनी बात रखी। रास्ते में मिलने वाले लोगों से संवाद करना और उन्हें नेताजी के संघर्षों की जानकारी देना उनकी यात्रा का अहम हिस्सा है। वह कहते हैं कि संघर्ष का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन विचारों पर विश्वास हो तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। नेताजी के जीवन से उन्होंने यही सीखा कि विपरीत परिस्थितियों में भी आम आदमी, किसान और गरीब के लिए आवाज उठाते रहना चाहिए।
साइकिल यात्रा के दौरान जब वह पुराने दिनों को याद करते हैं तो उनके चेहरे पर आत्मविश्वास नजर आता है। अपनी कहानी सुनाते हुए वह कहते हैं कि जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन समाजवादी विचारधारा से जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। उनके लिए यह यात्रा अपने संघर्षों को याद करने और नई पीढ़ी तक समाजवादी विचारों को पहुंचाने का भी माध्यम है।
‘सारे जहां से अच्छा…’ की पंक्तियों के साथ उनकी यात्रा आगे बढ़ती रहती है। हर पड़ाव पर एक नई कहानी, हर मुलाकात में संघर्ष का एक नया किस्सा और हर रास्ते पर नेताजी की यादेंयही तपस्वी की साइकिल यात्रा की पहचान बन गई है।
