सवालों के घेरे में चित्रकूट थाना पुलिस, जानकारी मांगने पर मीडियाकर्मियों का ही बनाने लगी वीडियो!
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चित्रकूट –चित्रकूट थाना पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार पुलिस ने लगभग 15 से 20 गरीब, मजदूर और असहाय लोगों को उठाकर पुराने थाना परिसर में बैठा दिया, लेकिन कार्रवाई के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
बताया जा रहा है कि जिन लोगों को थाने में रखा गया है, वे रोज कमाने-खाने वाले मजदूर हैं, जिनके लिए एक दिन की मजदूरी छूटना भी परिवार के सामने भूख का संकट खड़ा कर सकता है। ऐसे में उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और किस आधार पर उन्हें थाने में रखा गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
मामले की जानकारी लेने पहुंचे मीडियाकर्मियों ने जब थाना प्रभारी से सवाल पूछे तो जवाब देने के बजाय पुलिस कर्मियों द्वारा पत्रकारों का ही वीडियो बनाया जाने लगा। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस मीडिया के सवालों से बचना क्यों चाहती है और कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है।
*क्षेत्र में चर्चा है कि यदि कार्रवाई कानून व्यवस्था के तहत की गई है तो पुलिस को खुलकर इसकी जानकारी देनी चाहिए। वहीं गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को थाने में बैठाए जाने तथा मीडिया को जवाब न दिए जाने से पूरे घटनाक्रम पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। अब स्थानीय नागरिक और पत्रकार मामले की निष्पक्ष जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं।
जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश।
