May 25, 2026

संभावना गतिविधि में गूंजे लोकगीत, कानड़ा नृत्य ने बांधा समां

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संभावना गतिविधि में गूंजे लोकगीत, कानड़ा नृत्य ने बांधा समां
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जनजातीय संग्रहालय में कबीर गायन, बघेली लोकगीत और बुंदेली कानड़ा नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां

भोपाल – लोक संस्कृति की रंगत, पारंपरिक सुरों की मिठास और लोकनृत्य की जीवंत प्रस्तुतियों से रविवार को मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय का वातावरण सांस्कृतिक उल्लास से भर उठा। संग्रहालय में आयोजित “संभावना” गतिविधि के अंतर्गत नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी लोक परंपराओं की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मौका था रविवार को जनजातीय संग्रहालय में दोपहर 2 बजे संभावना गतिविधि में कानड़ा नृत्य का।

बद्रीलाल और सुमित्रा ने “मैं कैसे पाऊं री सखी…” से श्रोताओं को जोड़ा आध्यात्मिक भाव से…
कार्यक्रम में देवास से आए बद्रीलाल एवं सुमित्रा मालवीय और उनके साथियों ने कबीर गायन प्रस्तुत किया। उन्होंने “म्हारा सतगुरु है रंगरेज…”, “मैं कैसे पाऊं री सखी…”, “हो गई बहुत पुरानी चदरिया…”, “सुनो हो…” तथा “अब मैं तो अपने ही राम को रिझाऊं…” जैसे गीतों के माध्यम से संत कबीर की वाणी और लोकधर्म की गहराई को स्वर दिए। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया।

अर्चना के गीतों को दर्शकों ने खूब सराहा
वहीं मऊगंज से आईं अर्चना पाण्डेय एवं साथियों ने बघेली लोकगायन की प्रस्तुति देकर लोकजीवन की विविध भावनाओं को मंच पर जीवंत किया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना “गौरी गणेश मनाऊं आज…” से हुई। इसके बाद भोला गीत, कजरी, झूला, ददरा और देवी गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। “हरे रामा छाई घटा घनघोर बदरिया…” और “ई दोऊ नैना अनाड़ी हो…” जैसे गीतों को दर्शकों ने खूब सराहा।

रामकिशन और उनके साथियों ने प्रस्तुत किया बुंदेलखंड का प्रसिद्ध कानड़ा नृत्य
सागर से आए रामकिशन रजक एवं उनके साथियों ने बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कानड़ा नृत्य की प्रस्तुति दी। इस लोकनृत्य में कलाकार हाथों में रेकड़ी वाद्य लेकर पारंपरिक गीतों का गायन करते हैं, जबकि अन्य कलाकार वादन और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुति को जीवंत बनाते हैं। कानड़ा गायकों की विशेषता यह होती है कि वे तत्काल परिस्थितियों के अनुरूप गीतों की रचना और प्रस्तुति करने में दक्ष होते हैं। कलाकारों की ऊर्जा और तालमेल ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

भारत विमर्श भोपाल मध्य प्रदेश।

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