बच्चों और युवाओं की ऊर्जा से गूंजा मंच, अभिनय कार्यशाला में सीख रहे बॉडी लैंग्वेज
1 min read
अभिव्यक्ति की नई बारीकियां कीर्ति बैले एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स की 10 दिवसीय अभिनय कार्यशाला में श्रद्धा शालिनी मालवीय के निर्देशन में कलाकारों का रचनात्मक सफर जारी
भोपाल – कभी तेज कदमों के साथ मंच पर दौड़ते कलाकार, तो कभी शांत भावों में अपनी देह और चेहरे के हावभाव के जरिए भावनाओं को व्यक्त करते युवा और बच्चे – यह दृश्य इन दिनों मायाराम सुरजन भवन में देखने को मिला। जहां कीर्ति परफॉर्मिंग आर्ट्स द्वारा आयोजित 10 दिवसीय अभिनय कार्यशाला का नौवां दिन उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। 15 मई से 25 मई तक चल रही इस कार्यशाला में बच्चों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। कार्यशाला की खास बात अभिनेत्री, थिएटर प्रशिक्षक और निर्देशक श्रद्धा शालिनी मालवीय की मौजूदगी है, जिनके निर्देशन और अनुभव से प्रतिभागियों को अभिनय की नई तकनीकों को समझने और सीखने का अवसर मिल रहा है। यहां प्रतिभागी केवल अभिनय नहीं सीख रहे, बल्कि शरीर, आवाज और भावनाओं के बीच तालमेल बनाकर खुद को एक बेहतर कलाकार के रूप में तैयार कर रहे हैं।
कंटेम्पररी और छउ कला को लोगों ने जाना
श्रद्धा शालिनी मालवीय समकालीन (कंटेम्पररी) मूवमेंट्स और छउ (Chhau) जैसी शारीरिक अभिव्यक्ति आधारित कला शैलियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अभिनय की गहराइयों से परिचित करा रही हैं। कार्यशाला के दौरान वे लगातार कलाकारों के साथ संवाद, अभ्यास और विभिन्न प्रयोगों के जरिए उन्हें मंचीय प्रस्तुति की बारीकियां समझा रही हैं।
बॉडी मूवमेंट्स, ब्रीथिंग एक्सरसाइज, वॉइस मॉड्यूलेशन, फेस एक्सप्रेशन का किया अभ्यास
पिछले कई दिनों में प्रतिभागियों को बॉडी मूवमेंट्स, ब्रीथिंग एक्सरसाइज, वॉइस मॉड्यूलेशन, फेस एक्सप्रेशन और विभिन्न इंप्रोवाइजेशन सिचुएशन्स पर गहन अभ्यास कराया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य कलाकारों को मानसिक और शारीरिक रूप से अधिक खुला, आत्मविश्वासी और अभिनय के लिए तैयार बनाना है। कार्यशाला में शामिल युवा कलाकारों का कहना है कि यहां उन्हें अभिनय के साथ-साथ आत्मअभिव्यक्ति और टीमवर्क की भी सीख मिल रही है।


समापन दिवस पर होगी विशेष प्रस्तुति
कार्यशाला के समापन दिवस पर प्रतिभागियों द्वारा एक विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। प्रस्तुति की स्क्रिप्ट रीडिंग पूरी हो चुकी है और कलाकारों के बीच पात्रों का विभाजन भी कर दिया गया है। वर्तमान में सभी प्रतिभागी अपने-अपने किरदारों की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसके अलावा कार्यशाला में प्रस्तुति से जुड़े महत्वपूर्ण थिएटर टर्म्स, अभिनय तकनीकों और मंचीय अनुशासन की भी जानकारी दी जा रही है। कंटेम्पररी मूवमेंट्स को प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है, जिनके माध्यम से कलाकार अपनी भावनाओं और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करेंगे। विभिन्न एक्सरसाइज और समूह गतिविधियों के जरिए कलाकारों के बीच एक मजबूत बॉन्डिंग विकसित हुई है, जिसने कार्यशाला के माहौल को और अधिक जीवंत और सकारात्मक बना दिया है। प्रतिभागियों की मेहनत, समर्पण और सीखने की ललक कार्यशाला को एक रचनात्मक उत्सव का रूप दे रही है।
भारत विमर्श भोपाल मध्य प्रदेश।
