कार्यस्थलों पर श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नियोजक का कानूनी दायित्व
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सतना – सहायक श्रमायुक्त सतना ने जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों, कारखानों, निर्माण स्थलों और व्यावसायिक संस्थानों में कार्यरत श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। श्रम कानूनों के अंतर्गत, कार्यस्थल पर पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना अब हर नियोजक का अनिवार्य कानूनी दायित्व है। श्रम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए अधिनियमों के तहत पेयजल व्यवस्था अनिवार्य की गई है। कारखाना अधिनियम 1948 (धारा 18) के तहत प्रत्येक कारखाने में सुविधाजनक स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है। ठेका श्रम अधिनियम 1970 (धारा 18 एवं 20) के तहत ठेकेदार को कार्यस्थल के समीप स्वच्छ बर्तन या कूलर के साथ पीने योग्य जल उपलब्ध कराना होगा। यदि ठेकेदार इसमें विफल रहता है तो मुख्य नियोजक इसके लिए जिम्मेदार होगा। भवन एवं संनिर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 (धारा 32) के तहत सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षित और पर्याप्त मात्रा में पानी की व्यवस्था अनिवार्य है। दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 के तहत सभी दुकानों और संस्थानों में कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मानकों के अनुरूप पेयजल की व्यवस्था अपेक्षित है। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 (धारा 23) के तहत सभी संस्थानों में स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना नियोजक का वैधानिक दायित्व है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेयजल व्यवस्था के लिए कुछ न्यूनतम मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। जल पूरी तरह से पीने योग्य होना चाहिए और स्त्रोत स्वच्छ व सुरक्षित हो। पेयजल के स्थान पर स्पष्ट रूप से पेयजल अंकित होना चाहिए। पीने के पानी का स्त्रोत, गंदे या औद्योगिक जल के संपर्क से पूरी तरह पृथक होना चाहिए। जल की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए और भंडारण पात्रों की नियमित सफाई व रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। श्रम विभाग ने जिले के सभी नियोजकों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि श्रमिकों को कार्यस्थल पर मानवीय और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
भारत विमर्श सतना मध्य प्रदेश
