March 28, 2026

Vice-Chancellor pro.bhart mishra ने दिया मार्गदर्शक उद्वोधन

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चित्रकूट – गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के नवप्रवेशित छात्रों का शिक्षारंभ कार्यक्रम संपन्न हुआ। कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।इस मौके पर शिक्षा, संस्कार ,अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व, परीक्षा ,मूल्यांकन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जानकारी के साथ हुआ नए विद्यार्थियों का उन्मुखीकरण किया गया।
ज्ञातव्य हो कि विश्वविद्यालय कैम्पस में लागू प्रावधानों व नियमों, अध्ययन- अध्यापन की शैली, कर्तव्य, अनुशासन आदि से परिचित कराने के लिए शनिवार को छात्र कल्याण अधिष्ठान के तत्वावधान में छात्र उन्मुखीकरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा ने अपने मार्गदर्शक उदबोधन में कहा कि ग्रामोदय विश्वविद्यालय सामान्य विश्वविद्यालयों भांति एक उच्च शिक्षा संस्थान मात्र नहीं है अपितु प्रख्यात समाज शिल्पी भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख द्वारा परिकल्पित ग्रामोदय विचार धारा का प्रतीक है। शिक्षा और संस्कार इस विश्विद्यालय की विशेषता है। यहां पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कुलगुरु प्रो मिश्रा ने चित्रकूट के महत्त्व और इसके पर्यावरण की विशेषता पर प्रकाश डालते विद्यार्थियों को बताया कि चित्रकूट ऐसा पवित्र स्थान है जहां महर्षि अत्रि ने दुनिया के पहले विश्विद्यालय की स्थापना की थी। सामाजिक आवश्यकता और आदर्शो को आत्मसात कर संस्थापक कुलाधिपति भारत रत्न राष्ट्र ऋषि नाना जी देशमुख ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय की संकल्पना और कार्यशैली का अंतिम प्रारूप किया था।
कुलगुरु प्रो मिश्रा ने युवाओं के गुणों को बताते हुए विद्यार्थियो का आवाहन कि वे अनुशासन के साथ गुणवत्ता पूर्ण पढ़ाई और सामाजिक उत्तरदायित्व गतिविधि से अपने को पूरी तरह जोड़े रखें। यही ग्रामोदय विश्वविद्यालय की मुख्य विशेषता है । प्रो मिश्रा ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से लक्ष्य की ओर सतत बढ़ने की सलाह दी। प्रो मिश्रा ने माँ की गोद को पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व बनता है कि वे अपने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी दे। ग्रामोदय विश्वविद्यालय का सदैव प्रयास रहता है कि यहाँ से पढ़ाई करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का सर्वागीण विकास हो।यहाँ अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही न मिले अपितु उसके जीवन में आने वाली प्रत्येक कठिनाई का वह समाधान भी खोज सके।उन्होंने ग्रामोदय के वैशिष्ट्य को बताते हुए जीवनादर्श, ग्राम प्रवास, प्रार्थना सभा, सामूहिक मिलन आदि गतिविधियों में सहभागिता के लाभ बताए। प्रो मिश्रा ने अपने उदबोधन के मध्य प्रत्येक गतिविधि से जुड़े शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी का परिचय बड़ी गरिमा और उनकी उपयोगिता के साथ कराया, जिसकी प्रशंसा नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने मुक्त कंठ से कर रहे हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो भरत मिश्रा, कुलसचिव एवम अधिष्ठाताओ द्वारा विवेकानंद सभागार में स्थापित विद्या दायिनी माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। संगीत विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना एवम कुलगीत प्रस्तुत किया। तत्पश्चात अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो शशि कांत त्रिपाठी ने कार्यक्रम के औचित्य व उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस विश्वविद्यालय में छात्रावास, पुस्तकालय, खेल मैदान, कौशल शिक्षा आदि केंद्रीय व्यवस्था उपलब्ध है।उपकुलसचिव अकादमी डॉ साधना चौरसिया ने संचालित पाठ्यक्रमों व अवधि की जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक डॉ ललित कुमार सिंह ने परीक्षा व्यवस्था व परीक्षा नियमो की जानकारी दी।चीफ प्रॉक्टर डॉ विजय सिंह परिहार ने अनुशासन नियम बताए। सेंट्रल लाइब्रेरी इंचार्ज प्रो रघुबंश प्रसाद बाजपेयी ने पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकें व डिज़िटल बुक्स की जानकारी दी। कुलसचिव प्रो आर सी त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डॉ ललित कुमार सिंह ने किया। इस दौरान प्रो आई पी त्रिपाठी , प्रो नंदलाल मिश्रा , प्रो अमरजीत सिंह , प्रो शशि कांत त्रिपाठी और डॉ आंजनेय पांडेय आदि अधिष्ठातागण मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संयोजन प्रो शशि कांत त्रिपाठी अधिष्ठाता छात्र कल्याण अधिष्ठान ने किया।इस अवसर पर कला, प्रबंधन, विज्ञान, अभियांत्रिकी व कृषि संकाय के नवप्रवेशी व पूर्व से अध्ययन कर रहे छात्र छात्राओं सहित शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।

जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश

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