अन्तर्राष्ट्रीय रामलीला के छठे दिन राघव प्रयाग घाट पर दिखा मातृ शक्ति का विहंगम दृश्य
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एक मंच पर अलग-अलग देशों की रामकथा के प्रमुख प्रसंगों का जीवंत मंचन
चित्रकूट – मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा चित्रकूट के श्रीराघव प्रयाग घाट (नयागाँव) पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में मध्य प्रदेश शासन की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी ने शामिल होकर कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों की सराहना की। रामलीला के छठे दिन सद्गुरु सेवा संघ की ट्रस्टी ऊषा जैन, जिला पंचायत सतना की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सपना त्रिपाठी, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डॉ नीलम चौरे, होटल एसोसिएशन चित्रकूट की वाइस प्रेसिडेंट संगीता जैन, जिला उपाध्यक्ष राजेश्वरी द्विवेदी, जनपद अध्यक्ष मझगवां रेणुका जायसवाल, चित्रकूट की जिला महामंत्री अंजू वर्मा, डीआरआई चित्रकूट से सीमा पांडे ने मंचासीन होकर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शुभारंभ के पूर्व तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा राजस जोहरी एवं जगतगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डॉ प्रमिला मिश्रा द्वारा मंचासीन सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा है प्रभु श्री राम की कृपा और उनके पावन नाम में यह असीम शक्ति है कि जिन पर कृपा राम करे, वो पत्थर भी तिर जाते हैं। छठवें दिन रामलीला में वानर सेना निर्माण व समुद्र संवाद में माता सीता की खोज के बाद जब प्रभु श्री राम लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचते हैं, तब वानर सेना को लंका कूच के लिए तैयार किया जाता है। इसके बाद समुद्र देव से रास्ता मांगने के लिए प्रभु श्री राम का समुद्र संवाद और विनय का प्रसंग बेहद मार्मिक ढंग से दिखाया गया। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास और वीर भारत न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में एक मंच पर अलग-अलग देशों की रामकथा परंपराएं प्रदर्शित की जा रही है। उपरोक्त आयोजन विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन की देखरेख में किया जा रहा है।
भारत की सांस्कृतिक परंपरा में भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने की सुदीर्घ एवं समृद्ध परंपरा रही है। श्रीराम के जीवन के विविध प्रसंगों यथा जन्म, बाल लीलाओं, वनगमन, चित्रकूट में निवास, सीता हरण, हनुमान भक्ति, लंका विजय और अयोध्या वापसी को अभिनय, संवाद, संगीत, गायन एवं आकर्षक वेशभूषा के माध्यम से मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। 7 दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश की प्रतिष्ठित लीला मण्डलियों द्वारा प्रस्तुति दी जा रही है। संस्कृति विभाग, श्रीराम पथ गमन न्यास की ओर से कार्यक्रम का समन्वय कर रहे डॉ संजय मिश्रा ने बताया कि इस बार कलाकारों की प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हाई-टेक 3क् विजुअल्स और भव्य साउंड इफेक्ट्स का उपयोग किया गया है। रामलीला के अंतिम दिन रूस के मास्को का ‘दिशा रामलीला’ दल रावण वध और श्रीराम राज्य जैसे प्रसंग प्रस्तुत करेगा।
जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश।
