September 20, 2026

धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह

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धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप से बचाव के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह
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सतना – सतना एवं मैहर जिले में धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। फसल को कीट से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां जिला सतना के वैज्ञानिकों ने किसानों को कीट की पहचान एवं प्रभावी नियंत्रण के संबंध में आवश्यक सलाह दी है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार पत्ती लपेटक कीट की सुंडी धान की पत्तियों के किनारों को आपस में जोड़कर गोल नली या मोड़ बना लेती है। इसके बाद सुंडी पत्ती के अंदर रहकर पत्ती के हरे भाग को खुरचकर खाती है। इससे प्रभावित पत्तियां सफेद अथवा कागज जैसी पीली दिखाई देने लगती हैं। पत्ती को खोलने पर इसके अंदर हरे या पीले रंग की छोटी सुंडी (इल्ली) दिखाई दे सकती है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों का नियमित निरीक्षण करें और पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप के लक्षण दिखाई देने पर नियंत्रण के लिए निम्नलिखित में से किसी एक कीटनाशक का उपयोग करें। क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोएल 9.3 प्रतिशत$लैम्ब्डा-साइहलोथ्रिन 4.6 प्रतिशत जेडसी की 80 से 100 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़, अथवा इंडोक्साकार्ब 14.5 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़, अथवा थियामेथोक्सम 12.6 प्रतिशत $ लैम्ब्डा-साइहलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेडसी की 60 से 80 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ का उपयोग किया जा सकता है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि कीट प्रकोप की स्थिति में समय रहते नियंत्रण उपाय अपनाएं तथा कीटनाशक का प्रयोग निर्धारित मात्रा एवं लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही करें। अधिक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां जिला सतना के कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर सकते हैं।

भारत विमर्श सतना मध्य प्रदेश।

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