चित्रकूट के थरपहाड़ गांव में रास्ता न होने से बिगड़ी मरीज की हालत
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कंधे पर टांगकर अस्पताल ले जाने को मजबूर ग्रामीण।
चित्रकूट- नगर परिषद क्षेत्र के थरपहाड़ गांव में बुनियादी सुविधाओं का अकाल इस कदर गहराया हुआ है कि आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को किसी भी आपात स्थिति में मरीज को झोली या टाट में बांधकर कंधे पर टांगकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। ताजा मामला थरपहाड़ गांव का ही है, जहाँ 28 वर्षीय गोरे सिंह पिता बब्बू सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। लगातार उल्टी और दस्त होने के कारण वे अत्यधिक शारीरिक कमजोरी का शिकार हो गए थे। परिजनों को उन्हें उपचार के लिए मुख्य मार्ग तक पहुंचाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि अस्पताल से प्राथमिक दवा कराने के बाद जब उन्हें घर वापस लाया जा रहा था, तब भी रास्ते के अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, गाँव में जब भी किसी मरीज, वृद्ध या गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ती है, तो हर बार यही दर्दनाक मंजर देखने को मिलता है, दूसरी ओर प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के दावे पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी केवल टेंडर होने और जल्द निर्माण कार्य शुरू होने का ढिंढोरा पीट रहे हैं, जबकि धरातल पर आज तक न तो कोई ठेकेदार पहुंचा है और न ही कोई जमीनी काम शुरू हुआ है सूत्रों के अनुसार मार्ग बनाने का एक माह पहले ही टेंडर हो चुका है लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। जब भी इस विषय पर नगर परिषद या प्रशासनिक जिम्मेदारों से जवाब मांगा जाता है, तो वे भोपाल स्तर पर स्वीकृति अटके होने जैसी बातें कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। मूलभूत सड़क सुविधा न मिलने से थरपहाड़ गांव के निवासियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
जावेद मोहम्मद विशेष संवाददाता भारत विमर्श चित्रकूट मध्य प्रदेश।
