January 26, 2026

22 मार्च 2019 का दिन न्यूज़ीलैंड के इतिहास में सुनेहरे अक्षरों में लिखा जाएगा

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न्यूज़ीलैंड : क्राइस्टचर्च की मस्जिदों में 15 मार्च 2019 में हुए आतंकवादी हमलों के बाद न्यूज़ीलैंड की मस्जिदों में एक बार फिर भव्य तरीक़े से जुमे की नमाज़ अदा की गई.

जहा एक तफर 15 मार्च 2019 न्यूज़ीलैंड के इतिहास में काले दिवस के रूप में याद रखा जाएगा तो दूसरी ओर शुक्रवार 22 मार्च 2019 का दिन न्यूज़ीलैंड के इतिहास में सुनेहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. हमले के बाद इस देश के हर नागरिक ने और मौजूदा प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न ने जिस तरह दरिया दिल दिखाया है वो कबीले तारीफ़ है.

न्यूज़ीलैंड की आतंकवादी हमले की शिकार अन्नूर मस्जिद के सामने हेग्ले पार्क में हज़ारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर एक साथ नमाज़ अदा की. जुमे की नमाज़ के लिए आज़ान हुई वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई और आज़ान के समाप्त होते ही दो मिनट के लिए सब ख़ामोश हो गए. हेग्ले पार्क में आयोजित जुमे की नमाज़ में न केवल इस देश के मुसलमानों ने भाग लिया बल्कि इस देश के हर धर्म के लोग इस नमाज़ में शामिल हुए और आतंकी हमले में शहीद होने वालों को श्रद्धांजलि दी, साथ ही पूरी दुनिया में आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यह संदेश दिया कि हम सब मुसलमानों के साथ है.

नमाज़े जुमा के बाद न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न ने लोगों को संबोधित किया. उन्होंने अपने भाषण का आरंभ पैग़म्बरे मोहम्मद swa की हदीस से किया. प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न ने कहा कि हम एक हैं, मुसलमानों के शोक में बराबर के भागीदार हैं और यह ऐसा समय है कि पूरा न्यूज़ीलैंड शोक में डूबा हुआ है.

22 मार्च 2019 का दिन न्यूज़ीलैंड के लिए इसलिए भी यादगार बन गया क्योंकि जुमे की नमाज़ के लिए होने वाली आज़ान, जुमे का भाषण और नमाज़ इस देश के सरकारी टीवी चैनल से सीधे प्रसारित की गई. इस नमाज़ में शामिल इस देश की प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न सहित सभी ग़ैर मुस्लिम महिलाएं अपने सरों को ढांके हुईं थीं. न्यूज़ीलैंड ने जिस तरह इस बुरे वक़्त में अपने देश के जनता के साथ दिख रही है ये पुरे विश्व को एक मैसेज है. अमन का, भाईचारा का, देश प्रेम का.

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