October 23, 2026

भोपाल में 6 से 10 जून तक आयोजित होगा ‘महुआ महोत्सव’, जनजातीय संस्कृति और देशज ज्ञान पर होगा विशेष फोकस

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भोपाल में 6 से 10 जून तक आयोजित होगा ‘महुआ महोत्सव’, जनजातीय संस्कृति और देशज ज्ञान पर होगा विशेष फोकस
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भोपाल – 6 जून 2026। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय के स्थापना के तेरहवें वर्ष के उपलक्ष्य में 6 से 10 जून 2026 तक ‘महुआ महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव का शुभारंभ 6 जून को शाम 6:30 बजे मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय परिसर में होगा। आयोजन का मुख्य विषय “जनजातीय जीवन, देशज ज्ञान परंपरा एवं सौन्दर्यबोध” रखा गया है।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। महोत्सव का आयोजन मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के संरक्षण में किया जा रहा है।

महोत्सव के पहले दिन 6 जून को ‘राजा लोखनुड़ी’ गोंडवानी आख्यान पर आधारित नृत्य-नाट्य तथा गदल्ली नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। 7 जून को ‘महाबली छत्रसाल’ विषय पर आधारित नृत्य-नाट्य का मंचन होगा, जिसमें बुंदेलखंड के वीर शासक के जीवन और योगदान को प्रस्तुत किया जाएगा। 8 जून को शिप्रा नदी महिमा पर आधारित नृत्य-गान का आयोजन होगा।

7 से 10 जून तक देश के विभिन्न राज्यों की लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं की रंगारंग प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने को मिलेंगी। इनमें मध्यप्रदेश का निमाड़ी और बरेली गायन, छत्तीसगढ़ का पंडवानी गायन, उत्तरप्रदेश का अल्हा गायन, मध्यप्रदेश का गुड़ुमबाजा नृत्य, उत्तरप्रदेश के करमा, झमकड़ा, घुमार और चैल नृत्य, तेलंगाना का माथुरी नृत्य, राजस्थान के आंगी और गैर नृत्य, हरियाणा के घमर एवं जंजरिया नृत्य, कर्नाटक का कमसाले नृत्य, आंध्रप्रदेश का तोलुबोम्मलाटा, राजस्थान का रणपा नृत्य, ओडिशा का चैता घोड़ा नृत्य, सिक्किम का सिंघीछाम नृत्य, त्रिपुरा का होजागिरी और मोसाकसुरमानी नृत्य तथा उत्तराखंड के तांदी और हारूल नृत्य शामिल हैं।

महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा। इनमें मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों के जनजातीय नृत्यों की कार्यशाला, मिट्टी के बर्तनों पर चित्रांकन और पारंपरिक शिल्प निर्माण, देशज खानपान तथा हस्तशिल्प प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रमुख हैं।

आयोजकों के अनुसार महुआ महोत्सव का उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और देशज ज्ञान परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम में सभी नागरिकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा।

भारत विमर्श भोपाल मध्य।

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